अरुणा सीतेश

Aruna Sitesh अरुणा सीतेश

भूले-बिसरे रचनाकार : अरुणा सीतेश डा. अरुणा सीतेश जानी-मानी कथाकार थी। चांद भी अकेला है, वही सपने, कोई एक अधूरापन, लक्ष्मण रेखा और छलांग उनकी कुछ प्रसिद्ध कृतियाँ हैं। डॉ॰ अरुणा सीतेश (३१ अक्टूबर १९४५-१९ नवंबर २००७) हिंदी की प्रसिद्ध कथाकार थीं। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से १९६५ में अंग्रेज़ी साहित्य में एम. ए. किया और […]

रामचन्द्र शुक्ल का साहित्येतिहास लेखन

रामचन्द्र शुक्ल का साहित्येतिहास लेखन

आचार्य रामचन्द्र शुक्ल साहित्येतिहास वह साहित्यिक विधा है जो हमें मानवता के क्रमिक विकास से परिचित कराती है तथा यह ज्ञान की वह शाखा है जिसमें युग चेतना और साहित्य चेतना का अनिवार्य योग होता है। इतिहास नामों की तालिका-मात्र नहीं है। वह घटनाओं और तिथियों की भी सूची मात्र नहीं है और साहित्यिक इतिहास […]

हिंदी साहित्य के इतिहास में आदिकाल

हिंदी साहित्य के इतिहास में आदिकाल

आदिकाल की प्रस्तावना हिन्दी साहित्य के इतिहास में लगभग 8वीं शताब्दी से लेकर 14वीं शताब्दी के मध्य तक के काल को आदिकाल कहा जाता है। इस युग को यह नाम डॉ॰ हजारी प्रसाद द्विवेदी से मिला है। आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने ‘वीरगाथा काल‘ तथा विश्वनाथ प्रसाद मिश्र ने इसे ‘वीरकाल‘ नाम दिया है। इस काल […]

क्या इस देश में एक ‘राम प्रसाद बिस्मिल नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी’ नहीं होनी चाहिए?

क्या इस देश में एक 'राम प्रसाद बिस्मिल नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी' नहीं होनी चाहिए?

तब काकोरी कांड की सुनवाई कोर्ट में चल रही थी. राम प्रसाद बिस्मिल के ख़िलाफ़ सरकारी वकील थे जगतनारायण मुल्ला. साजिशन बिस्मिल को केस लड़ने के लिए लक्ष्मी शंकर नाम का एक कमज़ोर वकील दिया गया. रामप्रसाद बिस्मिल नें वकील लेने से मना कर दिया और अपना केस ख़ुद लड़ने लगे. सुनवाई शुरू हुई….बिस्मिल कोर्ट […]

लाला श्रीनिवास दास

लाला श्रीनिवास दास

लाला श्रीनिवास दास (1850-1907) हिंदी के प्रथम उपन्यास के लेखक है. उनके द्वारा लिखे गए उपन्यास का नाम परीक्षा गुरू (हिन्दी का प्रथम उपन्यास) है जो 25 नवम्बर 1882 को प्रकाशित हुआ. लाला श्रीनिवास दास भारतेंदु युग के प्रसिद्ध नाटककार भी थे.   नाटक लेखन में लाला श्रीनिवास दास भारतेंदु के समकक्ष माने जाते हैं.   […]

सआदत हसन मंटो

सआदत हसन मंटो

सआदत हसन मंटो का जन्म 11 मई 1912 को पुश्तैनी बैरिस्टरों के परिवार में हुआ था. उसके वालिद एक नामी बैरिस्टर और शेसन जज थे.   बचपन से ही मंटो बहुत ज़हीन थे, मगर शरारती भी कम नहीं थे. दाख़िला इम्तहान उसने दो बार फेल होने के बाद पास किया. इसकी एक वजह उनका उर्दू में […]

घर जमाई – मुंशी प्रेमचंद

घर जमाई - मुंशी प्रेमचंद

हरिधन जेठ की दुपहरी में ऊख में पानी देकर आया और बाहर बैठा रहा। घर में से धुआँ उठता नजर आता था। छन-छन की आवाज भी आ रही थी। उसके दोनों साले उसके बाद आये और घर में चले गए। दोनों सालों के लड़के भी आये और उसी तरह अंदर दाखिल हो गये; पर हरिधन […]

ठाकुर का कुआँ – मुंशी प्रेमचंद

ठाकुर का कुआँ - मुंशी प्रेमचंद

जोखू ने लोटा मुँह से लगाया तो पानी में सख्त बदबू आयी । गंगी से बोला- यह कैसा पानी है ? मारे बास के पिया नहीं जाता । गला सूखा जा रहा है और तू सड़ा पानी पिलाये देती है ! गंगी प्रतिदिन शाम पानी भर लिया करती थी । कुआँ दूर था, बार-बार जाना […]

स्‍वामिनी – मुंशी प्रेमचंद

स्‍वामिनी - मुंशी प्रेमचंद

शिवदास ने भंडारे की कुंजी अपनी बहू रामप्यारी के सामने फेंककर अपनी बूढ़ी आँखों में आँसू भरकर कहा- बहू, आज से गिरस्ती की देखभाल तुम्हारे ऊपर है। मेरा सुख भगवान से नहीं देखा गया, नहीं तो क्या जवान बेटे को यों छीन लेते! उसका काम करने वाला तो कोई चाहिए। एक हल तोड़ दूँ, तो […]

नशा – मुंशी प्रेमचंद

नशा – मुंशी प्रेमचंद

ईश्वरी एक बड़े जमींदार का लड़का था और मैं एक गरीब क्लर्क का, जिसके पास मेहनत-मजूरी के सिवा और कोई जायदाद न थी। हम दोनों में परस्पर बहसें होती रहती थीं। मैं जमींदारी की बुराई करता, उन्हें हिंसक पशु और खून चूसने वाली जोंक और वृक्षों की चोटी पर फूलने वाला बंझा कहता। वह जमींदारों […]

शांति – मुंशी प्रेमचंद

शांति - मुंशी प्रेमचंद

स्वर्गीय देवनाथ मेरे अभिन्न मित्रों में थे। आज भी जब उनकी याद आती है, तो वह रंगरेलियाँ आँखों में फिर जाती हैं, और कहीं एकांत में जाकर जरा देर रो लेता हूँ। हमारे और उनके बीच में दो-ढाई सौ मील का अंतर था। मैं लखनऊ में था, वह दिल्ली में; लेकिन ऐसा शायद ही कोई […]

बड़े भाई साहब – मुंशी प्रेमचंद

बड़े भाई साहब - मुंशी प्रेमचंद

मेरे भाई साहब मुझसे पाँच साल बड़े थे, लेकिन केवल तीन दरजे आगे। उन्होंने भी उसी उम्र में पढ़ना शुरू किया था जब मैने शुरू किया था; लेकिन तालीम जैसे महत्व के मामले में वह जल्दबाजी से काम लेना पसंद न करते थे। इस भावना की बुनियाद खूब मजबूत डालना चाहते थे जिस पर आलीशान […]