गद्य

अज्ञेय अनवर सुहैल अमरकांत अमृतलाल नागर
अरुण कमल अरुण प्रकाश अरुणा सीतेश अलका सरावगी
अशोक चक्रधर असगर वजाहत अयोध्या सिंह ‘हरिऔध अजित कुमार
आचार्य चतुरसेन शास्त्री आचार्य रामचंद्र शुक्ल आचार्य रामलोचन सरन आचार्य शिवपूजन सिंह
इलाचंद्र जोशी इस्मत चुग़ताई उदय प्रकाश उपेन्द्रनाथ अश्क
उर्मिला शिरीष एस आर हरनोट ओमा शर्मा कन्हैयालाल नंदन
कमलकान्‍त बुधकर कमलेश्वर कर्मेंदु शिशिर कामतानाथ
काशीनाथ सिंह क़ुर्रतुल ऎन हैदर कृष्ण चंदर कृष्ण बलदेव वैद
कृष्ण बिहारी कृष्णा सोबती गिरिराज किशोर गीतांजली श्री
चंद्रकिशोर जायसवाल चंद्र मोहन प्रधान चित्रा मुद्गल जयनंदन
जयशंकर प्रसाद जया जादवानी जितेन ठाकुर जैनेन्द्र
जोली अंकल दीपक शर्मा तरुण भटनागर तेजेन्द्र शर्मा
त्रिलोचन दिव्या माथुर देवकी नंदन खत्री धर्मवीर भारती
ध्यान माखीजा नरेन्द्र कोहली नामवर सिंह निर्मल वर्मा
तीसमारखां / नवीन सागर नमिता सिंह नीहार रंजन नाग नीरज दइया
नरेन्द्र मौर्य नासिरा शर्मा नीलाक्षी सिंह नित्यानंद `तुषार
पदुमलाल पन्नालाल बख्शी पांडेय बेचन शर्मा उग्र पुष्पा सक्सेना प्रत्यक्षा
प्रभा खेतान प्रभाकर श्रोत्रिय प्रभु जोशी प्रयाग शुक्ल
प्रियंवद प्रेमचन्द फणीश्वर नाथ ‘रेणु’ बनारसीदास
बाबू गुलाबराय भगवती चरण वर्मा भारतेंदु हरिश्चंद्र भीष्म साहनी
भूपेंद्र नाथ कौशिक “फ़िक्र” मधु कांकरिया मनमोहन सरल मनीषा कुलश्रेष्ठ
मनोहर श्याम जोशी मन्नू भंडारी ममता कालिया महावीर प्रसाद द्विवेदी
महेश कटारे महेश दर्पण महादेवी वर्मा
महुआ माझी मंगलेश डबराल मालती जोशी मैत्रेयी पुष्पा
मिथिलेश्वर मुशर्रफ आलम ज़ौकी मृणाल पांडे मृदुला गर्ग
मैत्रेयी पुष्पा मैथिली शरण गुप्त मोहन राकेश यज्ञदत्त शर्मा
यशपाल योगेंद्र आहूजा रामविलास शर्मा राहुल संकृत्यायन
रामवृक्ष बेनीपुरी राजेन्द्र सिंह बेदी राही मासूम रज़ा रघुवीर सहाय
रमेश चन्द्र झा रांगेय राघव राजेन्द्र यादव राजेश जैन
रवीन्द्र कालिया रवीन्द्र प्रभात लक्ष्मीकांत वर्मा ललित कार्तिकेय
लवलीन लाल्टू विभूति नारायण राय विकेश निझावन
विनोद कुमार शुक्ल विश्वनाथ त्रिपाठी विष्णु खरे विष्णु नागर
विष्णु प्रभाकर वीरेन्द्र जैन वृंदावन लाल वर्मा शमोएल अहमद
शरतचन्द्र शानी शिवकुमार मिश्र शिवमूर्ति
शरद जोशी शिवानी शीला रोहेकर शेखर जोशी
शैलेन्द्र सागर शैलेन्द्र चौहान शैलेश मटियानी श्रीलाल शुक्ल
संजीव सांवर दइया सआदत हसन मंटो सज्जाद ज़हीर
सत्येन कुमार सर्वेश्वर दयाल सक्सेना सीतेश आलोक सीमा शफ़क
सुकेश साहनी सुदर्शन नारंग सुधा अरोड़ा सुभाष नीरव
सुषमा मुनीन्द्र सूरज प्रकाश सुरेन्द्र चौधरी सुरेश कान्त
सूर्यबाला से.रा.यात्री सुभाष चन्द्र कुशवाहा स्वयं प्रकाश
हजारी प्रसाद द्विवेदी हरिशंकर परसाई हरि भटनागर हरीश अरोड़ा
हृदयेश हृषीकेश सुलभ ज्ञान चतुर्वेदी ज्ञानप्रकाश विवेक
ज्ञानरंजन

पद्य

आदिकाल (वीरगाथा काल )

चंद बरदाई विद्यापति

भक्तिकाल (सन १३२५ से १६५० तक) के प्रमुख कवि

तुलसीदास   कबीर दास सूरदास रसखान रहीम
मीराबाई बिहारी मलिक मोहम्मद जायसी

रीतिकाल (सन १६५० से १८५० तक) के प्रमुख कवि
रीतिबद्ध रीतिमुक्त् रीतिसिद्द्

बिहारी केशव भूषण पद्माकर
देव घनानंद रत्नाकर आचार्य कृपाराम
रसलीन ठाकुर आलम बोधा

आधुनिक काल (१८५०-अब तक)

(क) भारतेन्दु युग (१८५०-१९०० ई.)

भारतेन्दु हरिश्चंद्र मिर्ज़ा ग़ालिब प्रताप नारायण मिश्र बद्रीनारायण चौधरी ‘प्रेमघन’
राधाचरण गोस्वामी अम्बिका दत्त व्यास सुधाकर द्विवेदी

(ख) द्विवेदी युग (१९००-१९२०)

अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ रामचरित उपध्याय जगन्नाथ दास रत्नाकर गया प्रसाद शुक्ल ‘सनेही’
श्रीधर पाठक राम नरेश त्रिपाठी मैथिलीशरण गुप्त लोचन प्रसाद पाण्डेय
सियारामशरण गुप्त श्रीनाथ सिंह

(ग) छायावाद-युग (१९२०-१९३६)

जयशंकर प्रसाद सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ सुमित्रानंदन पंत महादेवी वर्मा

(घ) उत्तर-छायावाद युग (१९३६-१९४३) यह काल भारतीय राजनीति में भारी उथल-पुथल का काल रहा है.राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय, कई विचारधाराओं और आन्दोलनों का प्रभाव इस काल की कविता पर पडा . द्वितीय विश्वयुद्ध के भयावह परिणामों के प्रभाव से भी इस काल की कविता बहुत हद तक प्रभावित है. निष्कर्षत:राष्ट्रवादी, गांधीवादी, विप्लववादी, प्रगतिवादी, यथार्थवादी, हालावादी आदि विविध प्रकार की कवितायें इस काल में लिखी गई. इस काल के प्रमुख कवि हैं–

माखनलाल चतुर्वेदी बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन’ सुभद्रा कुमारी चौहान रामधारी सिंह ‘दिनकर’
हरिवंश राय बच्चन गोपालदास नीरज गुलाब खंडेलवाल भगवतीचरण वर्मा
नरेन्द्र शर्मा रामेश्वर शुक्ल ‘अंचल’ शिवमंगल सिंह ‘सुमन’ नागार्जुन
केदारनाथ अग्रवाल त्रिलोचन रांगेयराघव रमेश चंद्र झा

(च) प्रयोगवाद-नयी कविता (१९४३-१९६०) अज्ञेय ने सात नये कवियों को लेकर १९४३ में ‘तारसप्तक‘ नामक एक काव्य संग्रह प्रकाशित किया. उन्होंने इन कवियों को प्रयोगशील कहा. कुछ आलोचकों ने इसी आधार पर इन कवियों को प्रयोगवादी कहना शुरु किया और इस काल को प्रयोगवाद नाम दे दिया. इस नाम को नये कवियों ने अस्वीकार किया .इसके बाद पुन:अज्ञेय के संपादन में प्रकाशित काव्य-संग्रह ‘दूसरा सप्तक’ की भूमिका तथा उसमें शामिल कुछ कवियों के वक्तव्यों मे अपनी कवितओं के लिये ‘नयी कविता’ शब्द को स्वीकार किया गया . १९५४ में इलाहाबाद की साहित्यिक संस्था परिमल के कवि लेखकों-जगदीश गुप्त,रामस्वरुप चतुर्वेदीऔर विजय देवनरायण साही ने “नयी कविता” नाम से एक पत्रिका प्रकाशित कर बाकायदा ‘नयी कविता-आंदोलन’ का आरंभ किया .इस काल के प्रमुख कवि है-

अज्ञेय गिरिजाकुमार माथुर प्रभाकर माचवे भारतभूषण अग्रवाल
मुक्तिबोध शमशेर बहादुर सिंह धर्मवीर भारती नरेश मेहता
रघुवीर सहाय जगदीश गुप्त सर्वेश्वर दयाल सक्सेना कुंवर नारायण
केदारनाथ सिंह बालस्वरूप राही कुंवर बेचैन सोम ठाकुर
अशोक चक्रधर काका हाथरसी शैलेन्द्र चौहान

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