बेटोंवाली विधवा – मुंशी प्रेमचंद

बेटोंवाली विधवा

पंडित अयोध्यानाथ का देहांत हुआ तो सबने कहा, ईश्वर आदमी की ऐसी ही मौत दे। चार जवान बेटे थे, एक लड़की। चारों लड़कों के विवाह हो चुके थे, केवल लड़की क्‍वाँरी थी। संपत्ति भी काफी छोड़ी थी। एक पक्का मकान, दो बगीचे, कई हजार के गहने और बीस हजार नकद। विधवा फूलमती को शोक तो […]

माँ – मुंशी प्रेमचंद

माँ - मुंशी प्रेमचंद

आज बन्दी छूटकर घर आ रहा है। करुणा ने एक दिन पहले ही घर लीप-पोत रखा था। इन तीन वर्षों में उसने कठिन तपस्या करके जो दस-पाँच रूपये जमा कर रखे थे, वह सब पति के सत्कार और स्वागत की तैयारियों में खर्च कर दिये। पति के लिए धोतियों का नया जोड़ा लायी थी, नये […]

ईदगाह – मुंशी प्रेमचंद

ईदगाह - मुंशी प्रेमचंद

रमजान के पूरे तीस रोजों के बाद ईद आयी है। कितना मनोहर, कितना सुहावना प्रभाव है। वृक्षों पर अजीब हरियाली है, खेतों में कुछ अजीब रौनक है, आसमान पर कुछ अजीब लालिमा है। आज का सूर्य देखो, कितना प्यारा, कितना शीतल है, यानी संसार को ईद की बधाई दे रहा है। गाँव में कितनी हलचल […]

पूस की रात – मुंशी प्रेमचंद

पूस की रात

हल्कू ने आकर स्त्री से कहा- सहना आया है, लाओ, जो रुपये रखे हैं, उसे दे दूँ, किसी तरह गला तो छूटे । मुन्नी झाड़ू लगा रही थी। पीछे फिरकर बोली- तीन ही तो रुपये हैं, दे दोगे तो कम्मल कहाँ से आवेगा ? माघ-पूस की रात हार में कैसे कटेगी ? उससे कह दो, […]

अलग्योझा – मुंशी प्रेमचंद

अलग्योझा - मुंशी प्रेमचंद

भोला महतो ने पहली स्त्री के मर जाने बाद दूसरी सगाई की तो उसके लड़के रग्घू के लिये बुरे दिन आ गये। रग्घू की उम्र उस समय केवल दस वर्ष की थी। चैन से गाँव में गुल्ली-डंडा खेलता फिरता था। माँ के आते ही चक्की में जुतना पड़ा। पन्ना रुपवती स्त्री थी और रुप और […]

मुंशी प्रेमचंद की जीवनी

Munshi Premchand

प्रेमचंद का जन्म ३१ जुलाई १८८० को वाराणसी जिले (उत्तर प्रदेश) के लमही गाँव में एक कायस्थ परिवार में हुआ था। उनकी माता का नाम आनन्दी देवी तथा पिता का नाम मुंशी अजायबराय था जो लमही में डाकमुंशी थे।

हिंदू मां का मुस्लिम बेटा हरिद्वार से लौटा है

हिंदू मां का मुस्लिम बेटा हरिद्वार से लौटा है

यह कहानी काल्पनिक नहीं है। यह कहानी राजस्थान के नीमकाथाना की है, जिसके पड़ोसी राज्य से शुरू हुआ नफरत और बंटवारे का कारोबार आज पूरे देश को त्रस्त किये हुए है।

नागरिकता संशोधन विधेयक

नागरिकता संशोधन विधेयक

लोकसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक पर बहस के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने यों तो बड़ा ओजस्वी और तार्किक भाषण दिया, किंतु उनके समक्ष कुछ प्रश्न प्रस्तुत हैं। आश्चर्य की बात है कि ये प्रश्न उनके विरोधियों ने नहीं उनके समर्थकों ने प्रस्तुत किए हैं।

भूले-बिसरे रचनाकार : अजित कुमार

अजित कुमार

अजित कुमार का जन्म 9 जून 1933, उत्तर प्रदेश के उन्नाव में एक जमींदार परिवार में हुआ था| उनकी मां सुमित्रा कुमारी सिन्हा, बहन कीर्ति चौधरी और पत्नी स्नेहमयी चौधरी भी प्रसिद्ध कवयित्री थीं|   साहित्य और काव्य-प्रेम अजित जी को विरासत में मिला था| काव्य प्रतिभा और सुलझे विचारों की बदौलत उन्होंने हिंदी साहित्य […]

प्रेम – अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’

प्रेम – अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’

उमंगों भरा दिल किसी का न टूटे। पलट जायँ पासे मगर जुग न फूटे। कभी संग निज संगियों का न छूटे। हमारा चलन घर हमारा न लूटे। सगों से सगे कर न लेवें किनारा। फटे दिल मगर घर न फूटे हमारा।1। कभी प्रेम के रंग में हम रँगे थे। उसी के अछूते रसों में पगे […]

भूले-बिसरे रचनाकार : डॉ असग़र वजाहत

असग़र वजाहत 

मूलतः और प्रथमतः असग़र वजाहत कहानीकार हैं। कहानी के बाद उन्होंने गद्य साहित्य की लगभग सभी विधाओं में लेखन किया और अपने लिए हमेशा नए प्रतिमान बनाए। अपने लिए जिस भी विधा को उन्होंने चुना वहाँ हमेशा पहले दर्जे की रचना संभव हुई। असग़र वजाहत के लेखन में अनेक कहानी संग्रह, पाँच उपन्यास, आठ नाटक और कई अन्य रचनाएँ शामिल हैं। इनकी पहली कहानी 1964 के आसपास छपी थी तथा पहला कहानी संग्रह ‘अंधेरे से’ 1976 में आपातकाल के दौरान पंकज बिष्ट के साथ (संयुक्त रूप से) छपा था। इनकी कहानियों के अनुवाद अंग्रेजी, इतालवी, रूसी, फ्रेंच, ईरानी, उज्बेक, हंगेरियन, पोलिश आदि भाषाओं में हो चुके हैं।

शहर – अरुण कमल

शहर - अरुण कमल

कोई शहर जब कोई एक का होता है

तब वो शहर शहर नहीं होता
उतरते हवाई जहाज से देखता हूं जब
रौशनियों से खचाखच शहर