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लो दिन बीता लो रात गयी

लो दिन बीता लो रात गयी – हरिवंश राय बच्चन

सूरज ढल कर पच्छिम पंहुचा, डूबा, संध्या आई, छाई, सौ संध्या सी वह संध्या थी, क्यों उठते-उठते सोचा था दिन में होगी कुछ बात नई…

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