कविता, कहानी, ग़ज़ल, गीत, पौराणिक, धार्मिक एवं अन्य विधाओं का मायाजाल

विज्ञापन

भाई की चिठ्ठी – एकांत श्रीवास्तव

भाई की चिठ्ठी - एकांत श्रीवास्तव

भाई की चिठ्ठी - एकांत श्रीवास्तव

हर पंक्ति जैसे फूलों की क्यारी है
जिसमें छुपे काँटों को वह नहीं जानता
वह नहीं जानता कि दो शब्दों के बीच
भयंकर साँपों की फुँफकार है
और डोल रही है वहाँ यम की परछाईं

उसने लिखी होगी यह चिट्ठी
धानी धूप में
हेमंत की

यह जाने बिना
कि जब यह पहुँचेगी गंतव्य तक
भद्रा के मेघ घिर आए होंगे
आकाश में।

Related Post
विज्ञापन

अगर आप भी लिखते है तो हमें ज़रूर भेजे, हमारा पता है:

विज्ञापन

साहित्य: team@literatureinindia.in

हमारे प्रयास में अपना सहयोग अवश्य दें, फेसबुक पर अथवा ट्विटर पर हमसे जुड़ें

लिटरेचर इन इंडिया: हिंदी प्रेमियों द्वारा संचालित हिंदी साहित्य, समाचार एवं अन्य उपयोगी हिंदी सामग्री का मायाजाल
विज्ञापन
हाल फ़िलहाल
विज्ञापन