दी खुशियां तूने जो मुझको, भुलाना न आसान होगा,

मेरी हर कामयाबी पे, तेरा ही नाम होगा।

रखूँगा तेरे हर तर्ज़ को, खुद में समां कर इस तरह,

भूल कर भी खुद को, भुलाना न आसान होगा ।

खुदा भी तुझे मेरा कर, यह सोचता होगा,


बेमिसाल इस प्यार को, भुलाना न आसान होगा।

तेरी रफ़ाक़त से निकल कर, देख ली दुनिया,

तेरी शख्शियत को, भूलना न आसान होगा।

अपना कर तूने मुझे, बड़ा एहसान कर दिया।

तेरे हर सुख़न को, भुलाना न आसान होगा ।

तारीफ क्या करूँ अब तेरी “माज़, तू तो एक फूल है,

तेरी खुशबू को, भुलाना न आसान होगा।

माज़ अंसारी
 युवा शायर
(गौसगंज जिला हरदोई उत्तर प्रदेश)

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