कविता, कहानी, ग़ज़ल, गीत, पौराणिक, धार्मिक एवं अन्य विधाओं का मायाजाल

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हिंदी साहित्य

ईदगाह – मुंशी प्रेमचंद

रमजान के पूरे तीस रोजों के बाद ईद आयी है। कितना मनोहर, कितना सुहावना प्रभाव है। वृक्षों पर अजीब हरियाली है, खेतों में कुछ अजीब…

पूस की रात – मुंशी प्रेमचंद

हल्कू ने आकर स्त्री से कहा- सहना आया है, लाओ, जो रुपये रखे हैं, उसे दे दूँ, किसी तरह गला तो छूटे । मुन्नी झाड़ू…

अलग्योझा – मुंशी प्रेमचंद

भोला महतो ने पहली स्त्री के मर जाने बाद दूसरी सगाई की तो उसके लड़के रग्घू के लिये बुरे दिन आ गये। रग्घू की उम्र…

हरिशंकर परसाई की आत्महत्या

  बात उन दिनों की है जब शक्तिमान और रामायण धारावाहिक शुरू नहीं हुए थे. जब कम्प्यूटर भारत में नहीं आया था और न ही…

हिंदू मां का मुस्लिम बेटा हरिद्वार से लौटा है

यह कहानी काल्पनिक नहीं है। यह कहानी राजस्थान के नीमकाथाना की है, जिसके पड़ोसी राज्य से शुरू हुआ नफरत और बंटवारे का कारोबार आज पूरे…

नागरिकता संशोधन विधेयक

लोकसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक पर बहस के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने यों तो बड़ा ओजस्वी और तार्किक भाषण दिया, किंतु…

प्रेम – अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’

उमंगों भरा दिल किसी का न टूटे। पलट जायँ पासे मगर जुग न फूटे। कभी संग निज संगियों का न छूटे। हमारा चलन घर हमारा…

शहर – अरुण कमल

कोई शहर जब कोई एक का होता है तब वो शहर शहर नहीं होता उतरते हवाई जहाज से देखता हूं जब रौशनियों से खचाखच शहर

भूले-बिसरे रचनाकार : अरुण कमल

अरुण कमल का वास्तविक नाम 'अरुण कुमार' है। साहित्यिक लेखन के लिए उन्होंने 'अरुण कमल' नाम अपनाया और यही नाम उनकी स्वाभाविक पहचान बन गया…

नहान – अरुण प्रकाश

मैं जब उस मकान में नया पड़ोसी बना तो मकान मालिक ने हिदायत दी थी - `` बस तुम नहान से बच कर रहना। उसके…

विकल्प – अज्ञेय

वेदी तेरी पर माँ, हम क्या शीश नवाएँ? तेरे चरणों पर माँ, हम क्या फूल चढ़ाएँ? हाथों में है खड्ग हमारे, लौह-मुकुट है सिर पर-…

हिंदी साहित्य का इतिहास प्रथम संस्करण का वक्तव्य – आचार्य रामचन्द्र शुक्ल

हिंदी साहित्य के 900 वर्षों के इतिहास को चार कालों में विभक्त कर सकते हैं-- आदिकाल (वीरगाथाकाल, संवत् 1050-1375) पूर्व मध्यकाल (भक्तिकाल, संवत् 1375-1700) उत्तर…

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