आर्ट का पुल – फ़हीम आज़मी

आर्ट का पुल - फ़हीम आज़मी

पहले तो सारा इलाका एक ही था और उसका नाम भी एक ही था। इलाका बहुत उपजाऊ था। बहुत से बाग, खेत, जंगली पौधे, फूल और झाडियाँ सारे क्षेत्र में फैली हुयीं थीं। इसइलाके के वासियों को अपने जीवन की आवश्यकताएँ जुटाने के लिये किसी और इलाके पर आश्रित नहीं होना पडता था।खेतों से अनाज, […]

आत्माराम – मुंशी प्रेमचंद

आत्माराम – मुंशी प्रेमचंद

1 वेदों-ग्राम में महादेव सोनार एक सुविख्यात आदमी था। वह अपने सायबान में प्रात: से संध्या तक अँगीठी के सामने बैठा हुआ खटखट किया करता था। यह लगातार ध्वनि सुनने के लोग इतने अभ्यस्त हो गये थे कि जब किसी कारण से वह बंद हो जाती, तो जान पड़ता था, कोई चीज गायब हो गयी। […]